
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत प्रदेश में तेज गर्मी और पानी की कमी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. गंदे या दूषित पानी के इस्तेमाल से पीलिया (Jaundice) और मियादी बुखार (टायफाइड) के मरीजों में वृद्धि हो रही है.
महामारी संचालक डॉ. सुरेन्द्र पामभोई ने बताया कि इस साल अभी तक प्रदेश में लक्षण आधारित टायफाइड के 8,756 मरीज चिह्नित किए गए हैं. पिछले साल अप्रैल तक यह संख्या 10,954 थी. वहीं लैब कन्फर्म्ड टायफाइड के मामले विगत वर्ष के 247 की जगह इस बार केवल 124 ही रिपोर्ट हुए हैं.
तीव्र हेपेटाइटिस (Acute Hepatitis) के मामले अभी काफी कम हैं. इस साल 12 रिपोर्ट किए गए, जबकि पिछले साल 61 थे. राज्य स्तर पर साप्ताहिक सर्वेलेंस रिपोर्ट के मुताबिक, 15वें सप्ताह में इस साल की स्थिति पिछले साल (2025) की तुलना में बेहतर है. हेपेटाइटिस ई और कोलेरा के पॉजिटिव केस एक भी नहीं मिले हैं.
डॉ. पामभोई ने कहा कि हेपेटाइटिस और टायफाइड के इलाज के लिए पहले से गाइड लाइन जारी किया गया है. इस साल इन बीमारियों से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है.
सावधानियां और सलाह
- गंदे पानी से पीलिया और टायफाइड फैलता है. जहां पाइपलाइन से पानी साफ नहीं आ रहा हो, वहां पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा करके ही पिएं.
- पीलिया या टायफाइड के लक्षण बुखार, थकान, पीलापन, पेट दर्द आदि दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
- समय पर इलाज न होने पर जान को खतरा हो सकता है.
- प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे स्वच्छ पानी का उपयोग करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. बढ़ती गर्मी में पानी की कमी और दूषित स्रोतों से बचाव जरूरी है.
टाइफाइड क्या है?
टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है. यह दूषित पानी, खाना या गंदी हाथों से फैलता है.गर्मी के मौसम में पानी की कमी और प्रदूषण बढ़ने से इसका खतरा ज्यादा हो जाता है
जॉन्डिस क्या है?
पीलिया खुद कोई बीमारी नहीं, बल्कि लीवर की समस्या का लक्षण है. रायपुर-छत्तीसगढ़ में यह अक्सर हेपेटाइटिस ई या अन्य वायरल संक्रमण से होता है, जो गंदे पानी से फैलता है
मुख्य लक्षण-
- त्वचा और आंखों का पीला पड़ना
- गहरे पीले रंग का पेशाब
- हल्का या मिट्टी जैसे रंग का मल
- भूख न लगना, उल्टी-मतली
- पेट में दर्द, थकान और कमजोरी
- कभी-कभी हल्का बुखार या जोड़ों में दर्द
बचाव के उपाय: - साफ पानी ही पिएं—उबालकर या RO/UV फिल्टर से।
- हाथों की सफाई और स्वच्छता बनाए रखें।
- सड़क के खाने या बाहर का अधपका खान
खाने से बचें - हेपेटाइटिस ई से बचाव के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है कोई आम वैक्सीन भारत में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं,
इलाज
हेपेटाइटिस ई से होने वाला पीलिया ज्यादातर खुद ठीक हो जाता है, लेकिन डॉक्टर की निगरानी जरूरी है. आराम, हल्का भोजन (चावल, दाल, फल, सब्जियां), खूब पानी और दवाएं (जो डॉक्टर दें) लें. गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है. दोनों ही बीमारियों में घरेलू उपचार या बिना डॉक्टर के एंटीबायोटिक, दवा लेना बेहद खतरनाक है.
कारण
- टाइफाइड में गलत या अधूरी एंटीबायोटिक से बैक्टीरिया रेजिस्टेंट हो जाते हैं, इलाज मुश्किल और महंगा हो जाता है.
- बिना जांच के दवा लेने से लीवर या आंतों को नुकसान पहुंच सकता है.
- पीलिया में गलत इलाज से लीवर फेलियर या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं.
- दोनों बीमारियों में देरी से आंतों में छेद, खून की कमी, बेहोशी या मौत का खतरा बढ़ जाता है.
सलाह
लक्षण दिखते ही नजदीकी डॉक्टर या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। ब्लड टेस्ट (Widal, Typhidot या लिवर फंक्शन टेस्ट) से सही डायग्नोसिस होता है. खुद दवा न लें, खासकर एंटीबायोटिक.
समय पर सावधानी बरतें — उबला पानी पिएं, सफाई रखें और लक्षण पर तुरंत डॉक्टर दिखाएं. रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में पानी की व्यवस्था सुधारने की जरूरत है, ताकि ऐसे संकट कम हों.
