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छत्तीसगढ़

हस्तलिखित धरोहर का डिजिटलीकरण: रायपुर में 1931–47 की दुर्लभ पांडुलिपियां खोजी गईं

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में जिले में हस्तलिखित पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण एवं संरक्षण हेतु विशेष पहल की जा रही है। इस महत्वपूर्ण कार्य में राजकुमार कॉलेज के कस्टोडियन प्राचार्य अरविंद सिंह, उप प्राचार्य शिवेंद्र एस.एन. देव, सर्वेयर अनुरिमा शर्मा एवं प्रेरणा मिश्रा का विशेष योगदान रहा। उनके उत्कृष्ट सहयोग एवं कार्य हेतु कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने उन्हें सम्मानित किया।

इसी क्रम में राजकुमार कॉलेज, रायपुर के भ्रमण के दौरान वहां की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी लगभग 25 हस्तलिखित एवं चित्रकला पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण खोज की गई। इन पांडुलिपियों में वर्ष 1931 से 1947 के बीच की महत्वपूर्ण जानकारियां संकलित हैं। विशेष रूप से कॉलेज के अंतिम अंग्रेज प्राचार्य स्मिथ का लेख भी प्राप्त हुआ, जो तत्कालीन प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रकाश डालता है।

सर्वेक्षण के दौरान प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, बाबू जगजीवन राम, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी, कैलाश नाथ काटजू तथा ओडिशा की पूर्व महिला मुख्यमंत्री नंदिनी सतपथी के हस्ताक्षरयुक्त पत्र भी प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त 75 वर्ष से अधिक पुराने अनेक पांडुलिपि दस्तावेज भी संग्रहित किए गए।

उल्लेखनीय है कि कुछ अभिलेखों में “NAGPOOR” शब्द अंकित मिला, जो ब्रिटिश कालीन उच्चारण को दर्शाता है। साथ ही, राजकुमार कॉलेज की विजिटर बुक में डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ द्वारा उनके स्वयं के हस्तलेख में लिखा गया शुभकामना संदेश भी देखने को मिला, जो इस सर्वेक्षण की एक विशेष उपलब्धि रही।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि इन ऐतिहासिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर इन्हें भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा, ताकि हमारी समृद्ध धरोहर से नई पीढ़ी परिचित हो सके।

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