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छत्तीसगढ़

उपमुख्यमंत्री अरुण साव का कांग्रेस पर हमला, कहा- हार के डर से लगा रहे निष्पक्षता पर सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने नगर पंचायत उप-चुनाव को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस ने उप-चुनाव के निष्पक्ष न होने का आरोप लगाया था, जिस पर तंज कसते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि ऐसी बातें बोलना यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा जनता पर भरोसा करती है और चुनाव की अच्छी व्यवस्था है।

‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर’ की शुरुआत

राज्य में शुरू हो रहे ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर’ को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा हमारी सरकार ने सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आम लोग बिना किसी परेशानी के सीधे सरकार तक पहुंच सकें, इसी उद्देश्य से यह हेल्पलाइन जारी की गई है।

अरुण साव ने आगे कहा कि उसकी व्यवस्था ऐसी बनी है जिससे समस्या को दर्ज करना और समाधान को ट्रैक किया जा सकेगा। वहीं उन्होंने लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील करते हुए अपनी बाते सीधे सरकार तक पहुंचाने की बात कही है।

धान शॉर्टेज पर बोले साव

कांग्रेस द्वारा धान शॉर्टेज को लेकर सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि यह जांच का विषय है और जांच से ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने साफ किया कि सरकार में किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही क्षम्य (माफ करने योग्य) नहीं होगी। जहां भी शिकायत मिलेगी, वहां निष्पक्ष जांच होगी और कार्रवाई भी होगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस पार्टी का अपना पूरा राज ही घोटालों से भरा रहा हो, उन्हें हर जगह सिर्फ घोटाला ही दिखाई देता है।

महंत के राष्ट्रपति को पत्र बोले

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा राष्ट्रपति को पत्र लिखे जाने के मामले पर अरुण साव ने कहा कि जनता के जुड़े जनहित के मुद्दों को सामने लाना नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी है। अगर उनके पत्र को राष्ट्रपति ने संज्ञान में लिया है, तो यह तय प्रक्रिया का हिस्सा है।

नेताओं को दो टूक लहजे में हिदायत

‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम के दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर उठे सवालों को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नेताओं को दो टूक लहजे में हिदायत देते हुए कहा, “जनप्रतिनिधि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए उनका आचरण और व्यवहार हमेशा कानून व मर्यादा के दायरे में होना चाहिए। किसी भी जनप्रतिनिधि को कानून सम्मत आचरण ही शोभा देता है।”

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