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छत्तीसगढ़धर्म-अध्यात्म

रायपुर में आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 2026: भव्य शोभायात्राएं, ट्रैफिक एडवाइजरी और सोने की झाड़ू की अनोखी परंपरा

डेस्क रिपोर्टर। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के पावन अवसर पर आज रायपुर शहर भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा नजर आएगा। शहर के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। रथयात्रा को लेकर मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और प्रशासन ने भी सुरक्षा एवं यातायात की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

 

रथयात्रा के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे यात्रा मार्गों से बचते हुए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

 

ओडिशा के कलाकारों ने दी पुरी जैसी भव्यता

गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस बार भी ओडिशा से आए कलाकारों ने पारंपरिक शैली में मंदिर और रथों को सजाया है। मंदिर की दीवारों और प्रवेश द्वार को पुरी की तर्ज पर धार्मिक चित्रों और रंग-बिरंगी कलाकृतियों से आकर्षक रूप दिया गया है।

 

रथयात्रा के धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से विशेष पुजारियों को आमंत्रित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को पुरी धाम जैसी आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हो सके।

 

500 साल पुराना है टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर

रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना माना जाता है। पहले इसे ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। अग्रवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर का अंग्रेजी शासनकाल में विस्तार और सौंदर्यीकरण कराया गया था। समय के साथ यहां भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई और मंदिर की पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में स्थापित हो गई।

 

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर

जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के साथ श्रीराम दरबार, दो शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गरुड़ मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर भी स्थापित हैं। यही कारण है कि यह मंदिर वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है।

 

सोने की झाड़ू से होती है रथ मार्ग की सफाई

रायपुर की रथयात्रा की सबसे अनूठी परंपराओं में से एक है महाप्रभु के रथ मार्ग की सफाई। यहां साधारण झाड़ू की जगह करीब सवा-सवा किलो वजनी दो सोने की झाड़ुओं से रथ मार्ग को शुद्ध किया जाता है। ये झाड़ू पूरे वर्ष तिजोरी में सुरक्षित रखी जाती हैं और केवल रथयात्रा के दिन ही बाहर निकाली जाती हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।

 

ट्रैफिक एडवाइजरी

रथयात्रा के दौरान संबंधित मार्गों पर भारी भीड़ और यातायात का दबाव रहेगा।

 

यात्रा मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए प्रशासन एवं यातायात पुलिस की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं।

श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें।

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