जल विहार कॉलोनी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, आवासीय इलाके में कमर्शियल निर्माण पर सख्ती, अगली सुनवाई अब 12 मार्च को

रायपुर। जल विहार कॉलोनी में आवासीय क्षेत्र के भीतर कमर्शियल गतिविधियों को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। कॉलोनीवासियों द्वारा लगातार विरोध और शिकायतों के बाद मामला हाई कोर्ट में पहुंचा, जहां कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मौके की वस्तुस्थिति जानने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर दिया है। कमिश्नर को निर्देश दिया गया है कि वे स्थल का निरीक्षण कर विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करें।
मामले के अनुसार, जल विहार कॉलोनी मूल रूप से एक आवासीय क्षेत्र है, जहां शांतिपूर्ण वातावरण और पारिवारिक जीवन को ध्यान में रखते हुए प्लॉट आवंटित किए गए थे। लेकिन पिछले कुछ समय से यहां दुकानों, कैफे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन की गतिविधियां शुरू हो गईं। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि बिना विधिवत अनुमति के कमर्शियल निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की मूल प्रकृति प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यावसायिक गतिविधियों के चलते कॉलोनी में भीड़भाड़ बढ़ गई है, बाहरी लोगों की आवाजाही तेज हो गई है और पार्किंग की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। इसके साथ ही दारूबाजी और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी ने निवासियों की परेशानी और बढ़ा दी है। आरोप है कि आए दिन कॉलोनी की सड़कों पर खुलेआम शराब पी जाती है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को असुरक्षा का एहसास होता है।
विवाद का एक अन्य पहलू कॉलोनी के गार्डन से जुड़ा हुआ है। रहवासियों ने आरोप लगाया है कि गार्डन की जमीन एक निजी कंपनी को देने की कोशिश की गई। इस निर्णय का कॉलोनीवासियों ने जोरदार विरोध किया था। प्रदर्शन के बाद गार्डन से झूले हटाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई थी, जिससे लोगों में और आक्रोश फैल गया।
निवासियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और कॉलोनी की मूल आवासीय पहचान को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि आवासीय क्षेत्र में अनियंत्रित तरीके से कमर्शियल गतिविधियों को अनुमति दी गई तो भविष्य में हालात और बिगड़ सकते हैं।
हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की है, जो मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जानकारी देंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें कोर्ट की अगली सुनवाई और कमिश्नर की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जल विहार कॉलोनी में कमर्शियल निर्माण और गतिविधियों पर क्या निर्णय लिया जाएगा।
