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छत्तीसगढ़धर्म-अध्यात्म

छह दिवसीय दीपोत्सव 2025: अद्भुत संयोगों में होगी शुरुआत, जाने शुभ मुहूर्त

सुख-समृद्धि के लिए विशेष अवसर, ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थितियों और योगों के चलते हर दिन का अपना अलग धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रहेगा।

डेस्क रिपोर्टर, 16 अक्टूबर 2025/  दीपावली का पर्व 2025 में अद्भुत ज्योतिषीय संयोगों और शुभ योगों के बीच छह दिनों तक मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत 18 अक्टूबर को कार्तिक कृष्णपक्ष त्रयोदशी तिथि से होगी, जिसे धनतेरस के रूप में मनाया जाएगा। इस वर्ष दीपोत्सव में धनतेरस, हनुमान जन्मोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज जैसे महत्वपूर्ण पर्व शामिल होंगे। ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थितियों और योगों के चलते हर दिन का अपना अलग धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रहेगा।

🌟 उत्कृष्ट योगों में दीपोत्सव का शुभारंभ

धनतेरस, इस वर्ष शनिवार, 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन शनि प्रदोष, त्रिग्रहीय योग (सूर्य, बुध और मंगल का तुला राशि में संचार), तथा ब्रह्म योग जैसे विशेष संयोग बनेंगे। यह दिन सोना, चांदी, बर्तन, वाहन आदि खरीदने के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी माता का प्रकट होना इसी दिन हुआ था।

धनतेरस पर दीपदान, लक्ष्मी, गणेश, कुबेर व इंद्र की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्यता का वास होता है।


📅 दीपावली 2025 का दिनवार पर्व-क्रम

18 अक्टूबर (शुक्रवार):

  • त्रयोदशी तिथि शाम 6:32 बजे से प्रारंभ

  • प्रदोष व्रत एवं दीपदान

  • मुख्य द्वार पर चार दीपक जलाना विशेष फलदायक

  • धनतेरस की पूजा एवं खरीदारी का शुभ मुहूर्त

19 अक्टूबर (शनिवार):

  • दोपहर 1:55 बजे से चतुर्दशी तिथि

  • हनुमान जन्मोत्सव

  • हनुमान जी का पूजन शाम 5:37 से 7:14 तक मेष लग्न में करें

  • सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करें

20 अक्टूबर (रविवार):

  • दोपहर 2:57 बजे से अमावस्या तिथि

  • दीपावली महापर्व

  • स्थिर लग्न में पूजन शुभ:

    • कुंभ लग्न: 2:34 PM – 4:05 PM

    • वृष लग्न: 7:10 PM – 9:06 PM

  • लक्ष्मी पूजन, दीपावली की रात्रि में करें दीप सज्जा

21 अक्टूबर (सोमवार):

  • अमावस्या व्रत, स्नान-दान, श्राद्ध तिथि

  • महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस

22 अक्टूबर (मंगलवार):

  • शाम 6:18 बजे तक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा

  • गोवर्धन पूजा

  • गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजन करें

  • कृषक संस्कृति एवं प्रकृति के सम्मान का दिन

23 अक्टूबर (बुधवार):

  • भैया दूज, भाई-बहन के प्रेम का पर्व

  • बहनों द्वारा भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना

  • चित्रगुप्त पूजन एवं कलम-दवात की पूजा भी की जाएगी


🪔 धार्मिक मान्यता और ज्योतिषीय दृष्टि

पराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार, इस वर्ष दीपावली में बनने वाले त्रिग्रहीय संयोग, शनि प्रदोष, ब्रह्म योग, और स्थिर लग्नों का विशेष महत्व रहेगा। दीपोत्सव का प्रत्येक दिन साधकों के लिए देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर होगा। यम नियम का पालन करते हुए दीपदान और उपासना से पितृ दोष की शांति और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति प्राप्त होती है।


🔔 विशेष सुझाव

  • घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाएं

  • लक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न में करें

  • स्वच्छता, सजावट और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें

  • हनुमान पूजा के लिए मेष लग्न में समय का विशेष उपयोग करें


दीपोत्सव 2025, न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, पारिवारिक एकता, और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक भी है। शुभ ग्रह-नक्षत्रों और श्रेष्ठ योगों के संयोग में यह पर्व आत्मिक और भौतिक उन्नति के द्वार खोलने वाला सिद्ध होगा।

Disclaimer- यह जानकारी आचार्यों तथा पंचांगों के अनुसार तैयार की गई है, इस न्यूज़ के लिए बल्लुबाज जिम्मेदार नहीं है!

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