Home
🔍
Search
Add
E-Magazine
छत्तीसगढ़

निजी स्कूलों की मनमानी पर हाईकोर्ट नाराज़, शिक्षा सचिव से जवाब तलब

बिलासपुर। शहर के निजी स्कूलों में पढ़ाई और परीक्षा के अलग-अलग पैटर्न को लेकर उठे विवाद पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए राज्य के शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल तय की है।

मामला उस समय सामने आया जब अभिभावकों ने शिकायत की कि शहर के ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल और नारायणा टेक्नो स्कूल में बच्चों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई गई। लेकिन परीक्षा के समय अचानक छात्रों को 5वीं और 8वीं की सीजी बोर्ड परीक्षा में बैठा दिया गया। इस फैसले से छात्र और अभिभावक दोनों असमंजस और परेशानी में पड़ गए।

दरअसल, राज्य सरकार ने इस वर्ष 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं बोर्ड स्तर पर कराने का आदेश जारी किया था। इसके चलते वे निजी स्कूल, जिन्हें सीबीएसई की मान्यता प्राप्त नहीं है, उन्हें राज्य बोर्ड के नियमों का पालन करना पड़ा। लेकिन अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों ने पूरे साल सीबीएसई के नाम पर मोटी फीस वसूली और अंत में बच्चों को राज्य बोर्ड की परीक्षा दिला दी, जो उनके साथ अन्याय है।

इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों में काफी आक्रोश देखा गया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कलेक्टोरेट व कलेक्टर बंगले का घेराव भी किया। हालांकि, प्रशासन स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

यह पूरा प्रकरण राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि स्कूल प्रबंधन की मनमानी के कारण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि सीबीएसई ने मान्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब वही स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त कर सकते हैं, जो 12वीं तक संचालित होते हैं। ऐसे में जो स्कूल इन मानकों को पूरा नहीं करते, वे स्वतः राज्य सरकार के नियमों के अंतर्गत आ जाते हैं और उन्हें सीजी बोर्ड की परीक्षा प्रणाली अपनानी होती है।

हाईकोर्ट ने इस दलील के बावजूद मामले को गंभीर मानते हुए शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि वे पूरे घटनाक्रम पर शपथपत्र के साथ स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करें। अदालत यह जानना चाहती है कि आखिर छात्रों को पूरे साल एक पाठ्यक्रम पढ़ाकर परीक्षा किसी अन्य बोर्ड की क्यों दिलाई गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *