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छत्तीसगढ़

पारिवारिक विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, कहा – पहले जमा करें राशि फिर मिलेगी सुरक्षा

बिलासपुर। पारिवारिक विवाद के मामले में हाईकोर्ट ने पति व सास-ससुर की गिरफ्तारी पर रोक के लिए शर्त रखी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पति को मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करने और रसीद लेकर एसपी को दिखाने का निर्देश दिया है। इसके बाद ही गिरफ्तारी पर रोक का आदेश प्रभावी होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पति व पत्नी को मीडिएशन सेंटर में आपसी विवाद को सुलझाने कहा है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में एक लाख रुपये जमा नहीं किए गए तो गिरफ्तारी पर दी गई अंतरिम सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी। साथ ही आपराधिक याचिका भी बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः खारिज मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा कराई जाने वाली राशि को उसी में समायोजित किया जाएगा।

दरअसल, बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी अंकुर गौरहा उनके पिता राकेश गौरहा और मां रेखा गौरहा के खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौरहा ने सारंगढ़ थाने में दहेज प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर और आगे की दंडात्मक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि पत्नी भव्या द्वारा लगाए गए आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार शिकायत काफी विलंब से दर्ज कराई गई है तथा इसमें दहेज मांग या क्रूरता के कोई स्पष्ट और विश्वसनीय आरोप नहीं है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, लिहाजा इसे मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 8 जून 2026 को हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने 29 जून 2026 तक याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से जांच में पूरा सहयोग देने की शर्त रख दी है।

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