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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बिजली हुई महंगी, 1 जुलाई से बढ़ी दरें लागू

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगी बिजली का झटका लगा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है।

1 जुलाई से लागू होंगी नई बिजली दरें

छत्तीसगढ़ में आगामी महीने से बिजली उपभोक्ताओं को अधिक बिल का भुगतान करना पड़ेगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी।राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्य विवेक गनोदवाले और अजय सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान नई टैरिफ दरों की जानकारी देते हुए बताया कि बिजली कंपनी की वित्तीय स्थिति और बढ़ते घाटे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

बिजली कंपनी ने मांगी थी 24 प्रतिशत वृद्धि

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) ने आयोग के समक्ष बिजली दरों में करीब 24 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। कंपनी का तर्क था कि उत्पादन, वितरण और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण उसे भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।हालांकि आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए कंपनी की मांग को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और केवल 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी।

घरेलू उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ

नई टैरिफ दरों के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल में प्रति यूनिट 30 पैसे से लेकर 50 पैसे तक की वृद्धि की गई है। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लाखों उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने के कारण नए टैरिफ का असर सीधे मासिक घरेलू बजट पर दिखाई देगा।

व्यावसायिक और गैर-घरेलू उपभोक्ता भी प्रभावित

घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा गैर-घरेलू और व्यावसायिक श्रेणी के उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिली है। इस वर्ग के लिए बिजली दरों में 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि स्वीकृत की गई है।इसका असर छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, संस्थानों और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों पर भी पड़ेगा। बिजली लागत बढ़ने से कई क्षेत्रों में परिचालन खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

घाटे की भरपाई बना मुख्य कारण

बिजली दरों में वृद्धि के पीछे राज्य बिजली वितरण कंपनी का बढ़ता वित्तीय घाटा प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंपनी ने आयोग के समक्ष प्रस्तुत याचिका में बताया था कि बढ़ती लागत, बिजली खरीद व्यय, रखरखाव खर्च और अन्य वित्तीय दायित्वों के कारण उसकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।आयोग ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपभोक्ताओं से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद नई दरों को अंतिम रूप दिया।

1 जुलाई से दिखाई देगा असर

नई दरें लागू होने के बाद जुलाई माह से आने वाले बिजली बिलों में इसका सीधा असर दिखाई देगा। उपभोक्ताओं को अपनी खपत के अनुसार पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा।राज्य विद्युत नियामक आयोग का कहना है कि बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। हालांकि आने वाले दिनों में इस बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

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