लीगल गार्जियनशिप प्रमाण पत्र से दिव्यांगजनों को मिला कानूनी संरक्षण एवं अधिकारों का सहारा, परिवार पेंशन, दिव्यांग पेंशन सहित शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने में बनी मददगार
पेंशन, दिव्यांग पेंशन सहित शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने में बनी मददगार

डेस्क रिपोर्टर, 1 सितंबर 2026/ समाज कल्याण विभाग, जिला रायपुर द्वारा मानसिक एवं बौद्धिक रूप से दिव्यांगजनों के हितों, अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के लिए लीगल गार्जियनशिप (वैध संरक्षण) प्रमाण पत्र की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस पहल से ऐसे दिव्यांगजन, जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है और जिन्हें अपने पेंशन, परिवार पेंशन, संपत्ति, बैंकिंग अथवा शासकीय योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए अभिभावक की आवश्यकता होती है, उन्हें आवश्यक कानूनी संरक्षण एवं मार्गदर्शन मिल रहा।
कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा जिला रायपुर में वित्तीय वर्ष 2025-26 से वित्तीय वर्ष 2026-27 तक कुल 16 हितग्राहियों को लीगल गार्जियनशिप (वैध संरक्षण) प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। यह पहल मानसिक एवं बौद्धिक दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों एवं शासकीय लाभों से जोड़ने के साथ-साथ उनके परिवारों को आवश्यक विधिक सलाह, संरक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
लीगल गार्जियनशिप प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए संबंधित अभिभावक द्वारा समाज कल्याण विभाग में आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों एवं शपथ पत्र का परीक्षण किया जाता है। आवश्यकता के अनुसार संबंधित दिव्यांग व्यक्ति का निरीक्षण एवं सत्यापन भी किया जाता है। इसके बाद कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा प्रकरण का परीक्षण एवं विचार-विमर्श किया जाता है। पात्रता सुनिश्चित होने के पश्चात संबंधित व्यक्ति के लिए वैध अभिभावक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
इस व्यवस्था से लाभान्वित बूढ़ापारा, रायपुर निवासी श्री बद्री बिशाल पदमवार, पिता श्री सीताराम पदमवार ने अपनी 59 वर्षीय बड़ी बहन कुमारी इन्ना पदमवार के लिए लीगल गार्जियनशिप हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। कुमारी इन्ना पदमवार बौद्धिक अक्षमता से ग्रसित हैं। उनकी माता स्वर्गीय श्रीमती ताराबाई पदमवार शासकीय शिक्षिका के पद पर पदस्थ थीं तथा वर्ष 1994 में सेवानिवृत्त हुई थीं। उनका निधन 12 मार्च 2025 को हुआ।

माता के निधन के पश्चात कुमारी इन्ना पदमवार को परिवार पेंशन प्राप्त करने के लिए आवश्यक शासकीय एवं कानूनी कार्यवाही किया जाना जरूरी था। ऐसे में श्री बद्री बिशाल पदमवार ने अपनी बहन के हित में परिवार पेंशन प्रारंभ कराने एवं आवश्यक कानूनी कार्यवाही के उद्देश्य से उन्हें अपना वैध अभिभावक बनाए जाने के लिए आवेदन किया। प्रकरण के परीक्षण एवं आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कुमारी इन्ना पदमवार के लिए लीगल गार्जियनशिप प्रमाण पत्र जारी किया गया। इससे अब वे अपनी बहन के हित में परिवार पेंशन प्रारंभ कराने सहित आवश्यक शासकीय एवं कानूनी कार्यवाही कर सकेंगे।
इसी प्रकार मठपारा, रायपुर निवासी श्री धन्नू महंत, पिता श्री साधु महंत ने अपने 21 वर्षीय पुत्र जय महंत के लिए लीगल गार्जियनशिप हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। जय महंत गंभीर बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रसित हैं।
आवेदन में बताया गया कि शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली दिव्यांग पेंशन का लाभ जय महत को लंबे समय से प्राप्त नहीं हो पा रहा था। पेंशन पुनः प्राप्त करने एवं आवश्यक शासकीय कार्यवाही पूर्ण करने के लिए वैध अभिभावक की आवश्यकता होने के कारण श्री धन्नू महंत ने आवेदन प्रस्तुत किया। जिला रायपुर की समिति द्वारा प्रकरण का परीक्षण एवं आवश्यक जांच के बाद श्री धन्नू महंत को अपने पुत्र जय महंत का वैध अभिभावक प्रमाण पत्र जारी किया गया। इसके माध्यम से वे अपने पुत्र के लिए बंद दिव्यांग पेंशन को पुनः प्रारंभ कराने सहित अन्य आवश्यक शासकीय एवं कानूनी कार्यवाही कर सकेंगे।
उप संचालक, समाज कल्याण विभाग श्री अरविंद गेडाम ने बताया कि लीगल गार्जियनशिप प्रमाण पत्र मानसिक एवं बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि उनके आर्थिक एवं कानूनी अधिकारों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। वैध अभिभावक के माध्यम से दिव्यांग व्यक्ति को पेंशन, परिवार पेंशन, संपत्ति, बैंकिंग एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आवश्यक सहयोग मिलता है।
