Home
🔍
Search
Add
E-Magazine
छत्तीसगढ़धर्म-अध्यात्म

नाग पंचमी पौराणिक कथा (Nag Panchami Pauranik Katha) : आज देशभर में मनाया जा रहा है नाग पंचमी का त्यौहार! कथा जरूर पढ़े, इसके बिना पूजा का फल नहीं मिलता।

जब नाग देवता बने बहन के भाई, सोने की झाड़ू से लेकर चमत्कारी हार तक की कहानी

Nag Panchami 2026: नाग पंचमी सिर्फ नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और वचन की अद्भुत कहानी भी अपने भीतर समेटे हुए है। इस पर्व से जुड़ी एक बेहद रोचक पौराणिक कथा में एक ऐसी बहू का वर्णन मिलता है, जिसने एक सर्प की जान बचाई और वही सर्प आगे चलकर उसका धर्मभाई बन गया। इसके बाद जो घटनाएं हुईं, वे किसी चमत्कार से कम नहीं थीं।

जब छोटी बहू ने बचाई सर्प की जान

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक सेठ के सात पुत्र थे और सभी का विवाह हो चुका था। सबसे छोटी बहू बेहद सुशील, विदुषी और अच्छे संस्कारों वाली थी। उसका कोई भाई नहीं था।

एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने के लिए पीली मिट्टी लाने का निर्णय लिया। सभी बहुएं डलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने पहुंचीं। इसी दौरान मिट्टी के नीचे से एक सर्प निकल आया। बड़ी बहू उसे मारने के लिए खुरपी उठाने लगी।

तभी छोटी बहू ने उसे रोक दिया और कहा— “इसे मत मारो, यह तो निरपराध है।”

सर्प की जान बच गई। छोटी बहू ने जाते समय उससे कहा कि वह वहीं उसका इंतजार करे, लेकिन घर के कामों में व्यस्त होने के कारण वह अपना वादा भूल गई।

अगले दिन बनी सर्प की धर्मबहन

अगले दिन जब उसे अपना वादा याद आया तो वह उसी स्थान पर पहुंची। सर्प को वहां देखकर उसने प्यार से कहा— “सर्प भैया, नमस्कार!”

सर्प ने कहा कि तुमने मुझे भाई कह दिया है, इसलिए अब मैं तुम्हें नहीं डस सकता। छोटी बहू ने अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी। तब सर्प ने उसे अपनी बहन स्वीकार कर लिया और कहा कि वह जो चाहे मांग सकती है।

छोटी बहू ने कहा कि उसका कोई भाई नहीं था और अच्छा हुआ कि उसे एक भाई मिल गया।

भाई बनकर घर पहुंचा नाग

कुछ समय बाद वह सर्प मनुष्य का रूप धारण कर छोटी बहू के घर पहुंचा और उसे अपनी बहन बताते हुए अपने साथ ले जाने की बात कही। परिवार के लोगों को पहले विश्वास नहीं हुआ, लेकिन उसके समझाने पर उन्होंने छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया।

रास्ते में सर्प ने अपनी बहन को सच्चाई बताते हुए कहा कि वही उसका सर्प भाई है और उसे डरने की जरूरत नहीं है।

जब छोटी बहू उसके घर पहुंची तो वहां का धन-ऐश्वर्य देखकर हैरान रह गई। सर्प की माता ने उसे अपने भाई को ठंडा दूध पिलाने को कहा, लेकिन भूलवश उसने गर्म दूध पिला दिया। इससे सर्प का मुंह जल गया। हालांकि सर्प ने अपनी बहन को बचा लिया और उसे प्रेमपूर्वक विदा किया।

विदाई के समय सर्प और उसके पिता ने उसे सोना, चांदी, आभूषण, वस्त्र और अनेक मूल्यवान वस्तुएं देकर उसके घर पहुंचाया।

सोने की झाड़ू से लेकर चमत्कारी हार तक

छोटी बहू का वैभव देखकर बड़ी बहू के मन में ईर्ष्या पैदा हो गई। उसने ताना मारते हुए कहा कि उसके भाई को तो और भी अधिक धन देना चाहिए। सर्प ने बहन की इच्छा पूरी करते हुए सोने की वस्तुएं तक भिजवा दीं। यहां तक कि सोने की झाड़ू भी दे दी।

सर्प ने छोटी बहू को हीरे-मणियों से बना एक अद्भुत हार भी दिया था। उस हार की चर्चा जब राज्य की रानी तक पहुंची तो उसने हार मंगवा लिया।

लेकिन जैसे ही रानी ने हार पहना, वह हीरे-मणियों का हार सर्प में बदल गया। महल में हड़कंप मच गया। राजा ने छोटी बहू को दरबार में बुलाया और उससे इसका रहस्य पूछा।

छोटी बहू ने बताया कि यह हार उसके सर्प भाई का दिया हुआ है और उसके गले में हीरे-मणियों का रहता है, जबकि किसी दूसरे के गले में सर्प बन जाता है।

राजा ने जब छोटी बहू को हार पहनने के लिए कहा तो उसके गले में पहुंचते ही सर्प फिर से चमचमाते हीरे-मणियों के हार में बदल गया। राजा उसकी बात से संतुष्ट हुआ और प्रसन्न होकर उसे पुरस्कार भी दिया।

जब पति ने पत्नी पर किया संदेह

घर लौटने पर छोटी बहू का बढ़ता वैभव देखकर बड़ी बहू ने उसके पति के मन में भी संदेह पैदा कर दिया। पति ने पत्नी से धन का रहस्य पूछा।

छोटी बहू ने अपने सर्प भाई को याद किया। तभी सर्प देवता प्रकट हुए और उसके पति से कहा कि यदि वह अपनी धर्मबहन के चरित्र पर संदेह करेगा तो वह उसे दंड देगा।

यह सुनकर छोटी बहू का पति अपनी भूल समझ गया और उसने सर्प देवता का सम्मान किया।

नाग पंचमी का संदेश

धार्मिक मान्यताओं में इस कथा को भाई-बहन के प्रेम, वचन निभाने, करुणा और नाग देवता के प्रति श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन महिलाएं नाग देवता को भाई का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

नाग पंचमी की यह कथा सिर्फ एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि किसी जीव के प्रति दिखाई गई करुणा और निभाया गया सच्चा रिश्ता जीवन में अप्रत्याशित रूप से सुख और संरक्षण लेकर आ सकता है।

डिस्क्लेमर: यह कथा विभिन्न लोक एवं धार्मिक परंपराओं में प्रचलित नाग पंचमी की कथाओं में से एक है। इसके विवरण और मान्यताएं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *