नीब करोली बाबा: कलयुग के दिव्य संत, जिनकी कृपा और ‘हनुमान अंश’ की महिमा आज भी जागृत है
‘हनुमान अंश’ करोडों की कमाई, फिल्म से जानिए बाबा की अद्भुत कहानी

Desk Reporter Raipur:-
एक कंबल, एक साधारण चेहरा और असाधारण आध्यात्मिक प्रभाव… नीब करौरी बाबा का नाम आते ही भक्तों के मन में एक ऐसे संत की छवि उभरती है, जिनके लिए धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और मानवता था। उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित कैंची धाम से निकला यह आध्यात्मिक संदेश आज देश की सीमाओं से कहीं आगे पहुंच चुका है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर नीब करौरी बाबा में ऐसा क्या था, जिसने देश-विदेश की जानी-मानी हस्तियों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक को अपना भक्त बना लिया?
इसी सवाल का जवाब तलाशती है फिल्म ‘हनुमान अंश’, जिसने एक बार फिर नीब करौरी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कौन थे नीब करौरी बाबा?
नीब करौरी बाबा, जिन्हें भक्त महाराज जी के नाम से भी पुकारते हैं, 20वीं सदी के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। उनका जीवन भगवान हनुमान की भक्ति और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके अनुयायियों के लिए बाबा सिर्फ एक संत नहीं, बल्कि ऐसे आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे, जिनकी सबसे बड़ी सीख थी हर इंसान से प्रेम करो और जरूरतमंद की सेवा करो।

(मूल नाम: लक्ष्मी नारायण शर्मा) का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था। अल्पायु में ही सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने ईश्वर की खोज में संन्यास ले लिया। उनके जीवन में कोई आडंबर या दिखावा नहीं था। वे न तो लंबे प्रवचन देते थे और न ही किसी विशेष संप्रदाय का प्रचार करते थे।
एक साधारण सूती धोती या कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा केवल प्रेम, सेवा और भगवान के नाम-स्मरण पर जोर देते थे। उनका प्रसिद्ध सूत्र था:
”सबको प्रेम करो, सबको भोजन कराओ, भगवान का स्मरण करो और सच बोलो।”

बाबा का व्यक्तित्व जितना सरल दिखाई देता था, उनसे जुड़ी कथाएं उतनी ही रहस्यमयी और प्रभावशाली हैं। उनके भक्तों ने उनके जीवन से जुड़े अनेक अनुभव और चमत्कार सुनाए हैं। हालांकि इन घटनाओं को आस्था और व्यक्तिगत अनुभव के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए, लेकिन इतना जरूर है कि इन कथाओं ने बाबा के प्रति श्रद्धा को और गहरा किया।
हनुमान भक्ति से जुड़ा था गहरा रिश्ता
नीब करौरी बाबा की पहचान भगवान हनुमान के अनन्य भक्त के रूप में रही। उनके जीवन और उनसे जुड़े आश्रमों में हनुमान उपासना की विशेष छाप दिखाई देती है।
उत्तराखंड का कैंची धाम आज बाबा की सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक विरासतों में शामिल है। पहाड़ों के बीच बसा यह स्थान आज हजारों-लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां आने वाले भक्त बाबा के दर्शन के साथ-साथ हनुमान जी के प्रति उनकी अटूट भक्ति को भी महसूस करते हैं।
यही वजह है कि नीब करौरी बाबा की कहानी में हनुमान सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन का केंद्र दिखाई देते हैं।
कैंची धाम (Kainchi Dham) उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। यह नैनीताल–अल्मोड़ा मार्ग पर, भवाली से लगभग 9 किमी और नैनीताल से करीब 17 किमी दूर है। यही वह प्रसिद्ध आश्रम है, जिसका संबंध नीब करौरी बाबा (महाराज जी) से है।

आखिर इसे “कैंची धाम” क्यों कहते हैं?
‘कैंची’ का अर्थ है—Scissors यानी कैंची। इस स्थान का नाम किसी धार्मिक कथा के कारण नहीं, बल्कि यहां की भौगोलिक बनावट के कारण पड़ा।
कैंची धाम के आसपास पहाड़ी सड़क पर दो तीखे हेयरपिन मोड़ हैं। दोनों मोड़ जिस तरह एक-दूसरे को काटते हुए दिखाई देते हैं, उससे उनका आकार कैंची जैसा नजर आता है। इसी वजह से इस स्थान को ‘कैंची’ कहा जाने लगा और बाबा के आश्रम के कारण यह ‘कैंची धाम’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
वैश्विक फलक पर प्रभाव: जब पश्चिम ने झुकाया सिर
नीम करोली बाबा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। 60 और 70 के दशक में जब पश्चिमी दुनिया भौतिकता की अंधी दौड़ में शांति की तलाश कर रही थी, तब हॉलीवुड से लेकर सिलिकॉन वैली तक के कई दिग्गजों को बाबा के सान्निध्य में दिशा मिली।
स्टीव जॉब्स (एप्पल के संस्थापक): अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में प्रेरणा की तलाश में कैंची धाम आए।
मार्क जुकरबर्ग (मेटा के संस्थापक): जब फेसबुक शुरुआती संकटों से जूझ रहा था, उन्होंने जॉब्स की सलाह पर आश्रम का दौरा किया।
बाबा राम दास (रिचर्ड अल्पर्ट): हार्वर्ड के प्रोफेसर, जिन्होंने बाबा से प्रेरित होकर पश्चिमी जगत में ‘Be Here Now’ पुस्तक के जरिए आध्यात्मिक क्रांति ला दी।
विदेशी साधक बाबा के कंबल में जो खिंचाव महसूस करते थे, वह कोई भौतिक आकर्षण नहीं था; वह उसी चिरंतन हनुमंत प्रेम का स्पर्श था जो भाषा, देश और सीमाओं के परे है

‘हनुमान अंश’ सिर्फ फिल्म नहीं, एक आध्यात्मिक कहानी भी
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही हो सकती है कि यह दर्शकों को एक ऐसे संत की कहानी से जोड़ती है, जिनकी सबसे बड़ी पहचान किसी पद, संपत्ति या शक्ति से नहीं, बल्कि सेवा और प्रेम से बनी।
शोभिनाव सत्य ने बाबा यानी महाराज जी की भूमिका निभाई है, जबकि उनके बाल्यकाल के किरदार को विहान शेडगे ने निभाया है। पूर्णिमा तिवारी बाबा की पत्नी रामबेटी शर्मा के किरदार में नजर आती हैं। चंदन आनंद ने डॉ. राम नंदन भोसले की भूमिका निभाई है। इसके अलावा अनिल रस्तोगी महंत जी, गुलशन पांडे इंस्पेक्टर धर्म सिंह और अन्य कलाकार अलग-अलग महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देते हैं। फिल्म में इन पात्रों के जरिए बाबा के जीवन, संघर्ष, भक्ति और सेवा की कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत किया गया है।
बाबा के जीवन को समझने का रास्ता शायद उनके चमत्कारों की तलाश से ज्यादा उनकी सीख को समझने में है। क्योंकि अगर उनके जीवन से एक संदेश चुना जाए, तो वह बेहद सरल है, ईश्वर को पाने के लिए हमेशा किसी दूर की यात्रा जरूरी नहीं। किसी दुखी के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी भूखे को भोजन देना और किसी जरूरतमंद का हाथ थाम लेना भी ईश्वर की ओर जाने का रास्ता हो सकता है।
