रात 2 बजे तक मुख्यमंत्री निवास में चली बैठक, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा-अरुण साव ने बताया किन-किन मुद्दों पर हुई चर्चा

रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरकारी निवास में गुरुवार देर रात हाई लेवल मीटिंग आयोजित की गई। लगभग पांच घंटे तक चली इस मैराथन बैठक से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर भी तेज रहा। इस बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कैबिनेट के सभी मंत्री और भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
सीएम हाउस में चली यह बैठक देर रात करीब 2 बजे समाप्त हुई, जिसके बाद सभी मंत्री और संगठन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री निवास से रवाना हुए। बताया जा रहा है कि प्रदेश और प्रदेश के बाहर दौरे पर मौजूद कई मंत्रियों को भी तत्काल रायपुर बुलाया गया था।
मंत्रिमंडल में फेरबदल पर नहीं हुई कोई चर्चा : विजय शर्मा
हाई लेवल मीटिंग के बाद उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस तरह की बैठक पहली बार नहीं हुई है। सत्ता और संगठन के बीच हर तीन महीने में इस तरह की बैठक होती है। उन्होंने बताया कि आगामी कार्यक्रमों को लेकर इस बैठक में रणनीति बनाई गई है। मंत्री और विधायकों को उनके दौरों को लेकर जिम्मेदारी दी गई है। प्रभार क्षेत्रों में दौरों को लेकर समीक्षा की गई है। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर कहा कि इसपर बैठक में कोई बात नहीं हुई।
प्रधानमंत्री के 12 वर्ष के कार्यकाल पर हुई चर्चा : अरुण साव
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि यह रूटीन बैठक थी, जिसे मुख्यमंत्री ने बुलाया था। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों और नेताओं की जिम्मेदारी पर चर्चा हुई। इसके अलावा आगामी चुनाव को लेकर मंथन हुआ।
सब सुरक्षित है, छत्तीसगढ़ सुरक्षित है : रामविचार नेताम
बैठक के बाद मंत्री रामविचार नेताम ने मुस्कुराते हुए कहा कि “सब मुस्कुराइए, सब सेफ है और छत्तीसगढ़ सेफ है।” उन्होंने कहा कि सभी तरह की कयास निष्फल है।
कार्यों की समीक्षा पर हुई चर्चा : केदार कश्यप
वहीं मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बैठक में सभी के कार्यों की समीक्षा हुई, जैसे प्रभार क्षेत्र के दौरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रम और मंत्री-विधायकों के क्षेत्र दौरे व उनके कार्यक्रम की समीक्षा शामिल रही।
हालांकि, देर रात अचानक मुख्यमंत्री निवास में बुलाई गई बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन नेताओं ने इसे सत्ता और संगठन के बीच होने वाली नियमित समीक्षा बैठक बताया है।
