उषा दीदी ने ‘बिहान’ से बदली अपनी पहचान: स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं, आज सैकड़ों महिलाओं को दे रही हैं स्वरोजगार का मार्गदर्शन

रायपुर। जिले के आरंग ब्लॉक के ग्राम पंधी की रहने वाली उषा बाई मानिकपुरी कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहतीबती लेकिन अब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के जीवन में भी नई रोशनी लाई है।
वर्ष 2014 में स्व-सहायता समूह ‘शिवम’ से जुड़ने के साथ ही उषा दीदी के सफर की शुरुआत हुई। सप्ताहिक 20 रुपये की छोटी बचत से शुरू हुआ यह सफर आज उन्हें एक सफल उद्यमी और ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में स्थापित कर चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षित करना शुरू किया और अब तक 350 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा चुकी हैं।
बिहान योजना के तहत मिली 60 हजार रुपये की सहायता और बैंक ऋण से उन्होंने अगरबत्ती निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। आज वे अगरबत्ती, धूपबत्ती, अचार और पापड़ बनाकर हर महीने 10 से 12 हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही खेती और पशुपालन से भी उनकी सालाना आय में अच्छा इजाफा हुआ है।
उषा दीदी बताती हैं कि “बिहान से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हूं। मैंने अपने कमाई से अब तक आलमारी, कूलर, टीवी सहित बच्चों के लिए सायकल तक ले चुकी हूँ। कल तक मैं सिर्फ अपने घर तक ही सीमित रहती थी लेकिन बिहान योजना में जुड़ने के बाद एक नयी पहचान और आत्मविश्वास मिला है।”
उषा दीदी आज अपने परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना भी साकार कर रही हैं।
