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भारत का पहला पेट्रोल पंप कब खुला था? जानिए उस दौर में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत कितनी थी

डेस्क रिपोर्टर, रायपुर 17 मई 2026-

आज देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा तेज है। हाल ही में ईंधन के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार बढ़ती कीमतों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में पहला पेट्रोल पंप कब शुरू हुआ था? उस समय पेट्रोल कितने रुपये लीटर मिलता था और आखिर देश में पेट्रोल पहुंचता कैसे था?

 

भारत के पहले पेट्रोल पंप की कहानी बेहद दिलचस्प है। यह सिर्फ एक फ्यूल स्टेशन नहीं था, बल्कि देश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था की शुरुआत का प्रतीक भी था।

 

साल 1928 में खुला था भारत का पहला पेट्रोल पंप

भारत का पहला पेट्रोल पंप साल 1928 में शुरू हुआ था। उस समय मुंबई को बॉम्बे कहा जाता था। यह ऐतिहासिक पेट्रोल पंप बॉम्बे के ह्यूजेस रोड (Hughes Road) पर खोला गया था, जिसे आज एन.एस. पाटकर मार्ग और एनी बेसेंट रोड के नाम से जाना जाता है।

 

इस पेट्रोल पंप की शुरुआत बर्मा शेल कंपनी ने की थी, जो उस दौर में ईंधन कारोबार की बड़ी कंपनी मानी जाती थी। आज के आधुनिक पेट्रोल पंपों की तुलना में यह स्टेशन बेहद साधारण था। यहां केवल दो हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर लगाए गए थे और ईंधन स्टोर करने की क्षमता भी काफी सीमित थी।

 

हालांकि उस दौर में यह किसी बड़ी तकनीकी उपलब्धि से कम नहीं माना जाता था, क्योंकि उस समय भारत में गाड़ियों की संख्या बहुत कम थी और पेट्रोल जैसी सुविधा लोगों के लिए नई चीज थी।

 

उस समय भारत में नहीं बनता था पेट्रोल

आज भारत में कई बड़ी रिफाइनरियां मौजूद हैं, लेकिन अंग्रेजों के दौर में देश में पेट्रोल का उत्पादन नहीं होता था। उस समय पूरा ईंधन विदेशों से आयात किया जाता था।

 

मुख्य रूप से बर्मा, ईरान और पश्चिम एशिया के देशों से समुद्री जहाजों के जरिए पेट्रोल भारत लाया जाता था। बंदरगाह पर पहुंचने के बाद इसे बड़े लोहे के ड्रमों में भरा जाता और फिर ट्रकों या बैलगाड़ियों के जरिए पेट्रोल पंप तक पहुंचाया जाता था।

 

उस समय पेट्रोल भरने की प्रक्रिया भी आज जैसी नहीं थी। आधुनिक मशीनों की जगह कर्मचारी हाथ से चलने वाले पंप का इस्तेमाल करते थे। यह प्रक्रिया धीमी जरूर थी, लेकिन उस दौर में इसे आधुनिक तकनीक माना जाता था।

 

सिर्फ चंद पैसों में मिलता था पेट्रोल

अगर आज के पेट्रोल के दामों से तुलना करें तो 1928 की कीमत सुनकर शायद यकीन करना मुश्किल हो जाए। उस समय 1 लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 1 आना से 2 आना के बीच होती थी, यानी करीब 6 से 12 पैसे।

 

उस दौर में 1 रुपये में 16 लीटर से ज्यादा पेट्रोल खरीदा जा सकता था। हालांकि यह भी सच है कि उस समय लोगों की कमाई बेहद कम होती थी। कई मजदूरों और आम लोगों की दिनभर की कमाई 1 रुपये से भी कम होती थी। इसलिए उस समय भी पेट्रोल को आम आदमी के लिए सस्ता नहीं माना जाता था।

 

शुरुआती दौर में थीं कई चुनौतियां

भारत का पहला पेट्रोल पंप चलाना आसान नहीं था। उस समय देश की सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बेहद कम थी, इसलिए पेट्रोल की मांग भी सीमित थी।

 

सबसे बड़ी चुनौती सप्लाई की थी, क्योंकि पूरा सिस्टम विदेशों पर निर्भर था। मानसून के मौसम में समुद्री रास्तों से आने वाले ईंधन में देरी हो जाती थी। कई बार लोहे के ड्रमों में जंग लगने से पेट्रोल रिसने लगता था, जिससे भारी नुकसान होता था।

इसके बावजूद बर्मा शेल कंपनी ने धीरे-धीरे अपना नेटवर्क बढ़ाया और देश के अलग-अलग हिस्सों में नए पेट्रोल पंप खोलने शुरू किए।

बर्मा शेल से बनी BPCL

बर्मा शेल कंपनी ने कई दशकों तक भारत में पेट्रोल और मिट्टी के तेल का कारोबार किया। बाद में साल 1976 में भारत सरकार ने कंपनी का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसके बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी BPCL की स्थापना हुई।

 

आज BPCL देशभर में हजारों पेट्रोल पंप संचालित कर रही है। लेकिन इसकी शुरुआत उस छोटे से फ्यूल स्टेशन से हुई थी, जिसने भारत के परिवहन और औद्योगिक विकास की दिशा बदल दी।

 

आज कितना बदल गया है भारत?

जिस दौर में पेट्रोल हाथ से चलने वाले पंपों से भरा जाता था, आज वही भारत डिजिटल पेमेंट, ऑटोमेटिक डिस्पेंसर और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन तक पहुंच चुका है।

 

लेकिन इतिहास के पन्नों में दर्ज भारत का पहला पेट्रोल पंप आज भी देश के आधुनिक विकास की एक अहम शुरुआत माना जाता है।

 

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और इंटरनेट पर उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है।

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