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छत्तीसगढ़

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विवाद मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरपंच चुनाव याचिका खारिज करने का आदेश किया रद्द

बिलासपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सरपंच चुनाव के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को सीधे खारिज करने के एसडीएम कोर्ट के आदेश को कानूनन गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। साथ ही मामले में नए सिरे से सुनवाई करते हुए गवाही दर्ज करने और 60 दिनों के भीतर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जब चुनाव न्यायाधिकरण किसी मामले में विवाद के बिंदु तय कर देता है, तब बिना दोनों पक्षों की गवाही और विस्तृत सुनवाई के चुनाव याचिका को मनमाने ढंग से बंद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए एसडीएम कोर्ट भेजने का निर्देश रजिस्ट्री को दिया है।

सरपंच चुनाव से जुड़ा है मामला

मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के जनपद पंचायत कसडोल अंतर्गत ग्राम पंचायत हसुवा का है। यहां पिछले वर्ष हुए पंचायत चुनाव में गायत्री शर्मा और रितु अतुल केशरवानी सरपंच पद के लिए चुनाव मैदान में थीं। मतगणना के बाद पीठासीन अधिकारी ने रितु केशरवानी को विजयी घोषित किया था।

चुनाव परिणाम से असंतुष्ट गायत्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 122 के तहत एसडीएम न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी।

नामांकन पत्र में हस्ताक्षर को लेकर उठाया था सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचित सरपंच रितु केशरवानी ने अपने नामांकन पत्र में स्वयं हस्ताक्षर नहीं किए थे। उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए गए, जो भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

सुनवाई के दौरान एसडीएम कोर्ट ने विवाद के बिंदु तय कर दिए थे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर विवादित हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराने की मांग की थी।

एसडीएम कोर्ट ने बंद कर दी थी सुनवाई

मामले की सुनवाई के बीच एसडीएम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर चुनाव याचिका पर आगे की सुनवाई बंद कर दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए गायत्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि एसडीएम का आदेश छत्तीसगढ़ पंचायत (निर्वाचन याचिका, भ्रष्ट आचरण और सदस्यता के लिए अयोग्यता) नियम, 1995 के नियम 11 और 12 का उल्लंघन है।

60 दिन में निपटारे के निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एसडीएम कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया और निर्देश दिया कि दोनों पक्षों की गवाही दर्ज कर नियमानुसार सुनवाई पूरी की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि मामले का निराकरण 60 दिनों के भीतर किया जाए।

हाईकोर्ट के इस फैसले को पंचायत चुनाव विवादों और चुनाव याचिकाओं की सुनवाई प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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