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छत्तीसगढ़

यह हमारी अमूल्य धरोहर है, आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा ज्ञान – कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह

रायपुर।  भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आज शासकीय संस्कृत कॉलेज, रायपुर पहुंचकर वहां संरक्षित ऐतिहासिक महत्व की पाण्डुलिपियों एवं ताम्रपत्रों का अवलोकन किया।

इस अवसर पर कॉलेज के लाईब्रेरियन डॉ. सुनील कुमार सोनी ने कलेक्टर को विभिन्न पाण्डुलिपियों के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “संहिता वेद” वेदों में सबसे प्राचीन तथा मूल भाग है जिसमें देवताओं की स्तुति, छन्दोबद्ध मंत्र, श्लोकों का संग्रह है।

डॉ. सोनी ने “पुन्याह वाचन मातृका” की जनकारी देते हुए बताया कि यह हिन्दु धर्म के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करने के लिए देवी पूजन का प्रावधान है, इसी के माध्यम से लोगों द्वारा अपने पूर्वजों का ध्यान कर उनकी पूजा कर आशीर्वाद लिया जाता है तत्पश्चात् कार्य आरंभ किया जाता है इस पाण्डुलिपि में उन्हीं पूजा, विधि, मंत्रों एवं अनुष्ठान के बारे में बताया गया है। यह पाण्डुलिपियाँ कागज पर लिखी गई हैं। उन्होेंने ने बताया कि ये सभी पाण्डुलिपियां लगभग 200 वर्ष पुरानी हैं, जिन्हें दूधाधारी मठ से एकत्रित कर संरक्षित किया गया है।

उन्होंने ताड़पत्र पर लिखी गई पाण्डुलिपि “इति तर्क संग्रह दीपिका” के बारे में बताया कि इस पाण्डुलिपि में न्याय और वैशेषिक दर्शन के सिद्धांतों का संक्ष्प्ति परिचय प्राप्त होता है। तर्क संग्रह के मूल ग्रंथ में जिन सिद्धांतों को लिखा गया था, उसकी विस्तृत आलोचना होने के कारण उन सिद्धांतों का संशोधन रूप तर्क संग्रह दीपिका लिखा गया, इन्हीं सिद्धान्तों को ताड़पत्र पर लिखा गया है। उन्होेंने बारह राशियों के प्रतीक चिन्ह, उनकी विशेषताएं इत्यादि का वर्णन संक्षेप में बताया जिसे ताड़पत्र पर उकेरकर लिखा गया है।

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